वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में अक्षय तृतीया 22 अप्रैल को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया जप, तप, ज्ञान, स्नान, दान, होम आदि अक्षय रहते है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व पड़ता है। इस दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर समेत सभी शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जलधरी का इंतजाम किया जाता है वहीं विष्णु के मंदिरों में चंदन का लेप भी लगाया जाता है। मणिकर्णिका तीर्थ के चक्र पुष्करणी कुंड पर मां मणिकर्णिका देवी की प्रतिमा विराजमान होंगी और 24 को कुंड स्नान भी होगा।

वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया 22 अप्रैल को सुबह 7.49 बजे से 23 अप्रैल को सुबह 7.47 बजे तक रहेगी। इसके साथ ही श्री काशी विश्वनाथ दरबार में जलधरी अर्पित करने की परंपरा निभाई जाएगी। वैशाख की तपिश से बाबा को राहत दिलाने के लिए जलधरी से पूरे दिन गंगाजल शिवलिंग पर टपकता रहेगा। सावन मास की पूर्णिमा तक जलधरी तक सिलसिला जारी रहेगा। दूसरी तरफ नटवर नागर भगवान श्रीकृष्ण को पूरे 21 दिन तक चंदन की शीतलता का इंतजाम किया गया है। इ

इसके अलावा शहर के सभी द्वादश शिवलिंग, शिवमंदिरों और पंचक्रोशी परिक्रमा पथ पर स्थित शिवमंदिरों में जलधरी अर्पित की जाएगी। वैष्णव संप्रदाय के विष्णु व श्रीकृष्ण मंदिरों में भगवान को चंदन का शृंगार किया जाएगा। सोनारपुरा स्थित सनातन गौड़ीय मठ में नटवर नागर भगवान श्रीकृष्ण का चंदन पुष्प शृंगार किया जाएगा। 22 अप्रैल से इसकी शुरुआत होगी। 21 दिवसीय अनुष्ठान के दौरान भगवान का अलग-अलग रूपों में शृंगार किया जाएगा।

अक्षय तृतीया पर किया गया दान व पुण्य फलदायी

अक्षय तृतीया तिथि पर किए गए सभी धार्मिक कृत्य, दान व पुण्य के कार्य अक्षय होते हैं। ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि विष्णु धर्मोत्तर पुराण के लिए जो व्यक्ति अक्षय तृतीया का व्रत रखते हैं उसे सभी तीर्थों का फल प्राप्त हो जाता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त की मान्यता है। भगवान विष्णु, लक्ष्मी, कृष्ण की पंचोपचार एवं दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन का भी विधान है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 22 अप्रैल को सुबह 07.49 से दोपहर 12.20 मिनट तक है। इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 49 मिनट से लेकर अगले दिन 23 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 47 मिनट तक है।

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Ankita Yaduvanshi

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